Mata Leelawati Arya Bhikshu Propkarini Nyas

  • शरीर में ही सुख-दुख होते हैं। इस द्वंद से ऊपर उठाना ही मोक्ष है।
  • इच्छा का नाम ही वासना है। यही जन्म मरण के चक्कर का मूल है, इससे छूटना ही अपना लक्ष्य है।
  • विधि निषेध का ज्ञान है, मानव जीवन का स्वाध्याय है।
  • भगवान की विभूति का नाम सत्य है और उसके विधान का ऋत है।
  • इंद्रियों का संयम विजय तथा संपत्ति का मार्ग है और इनका असंयम ही पराजय तथा विपत्ति का मार्ग है।
  • जीवन के वाम और दक्ष दो मार्ग हैं। जिसकी इच्छा चाहे जहां जाए, योग की या अथवा भोर की ओर।
  • जाति प्रकृति के नियम में उल्लंघन तथा आदि प्रभु के नियम में उल्लंघन का परिणाम है।
  • वित्त भारी संपत्ति है और वृत आंतरिक संपत्ति है।
  • कलापूर्ण मानव जीवन पूर्णिमा है और कालाहीन मानव जीवन अमावस्या है।
  • नियम यम के लिए है नियम के पालन में यम की हत्या मत करो।
  • मानवीय कल्पतरु का नाम शांति है।

ब्रह्मचारी अखिलानंद जीझरिया

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