- शरीर में ही सुख-दुख होते हैं। इस द्वंद से ऊपर उठाना ही मोक्ष है।
- इच्छा का नाम ही वासना है। यही जन्म मरण के चक्कर का मूल है, इससे छूटना ही अपना लक्ष्य है।
- विधि निषेध का ज्ञान है, मानव जीवन का स्वाध्याय है।
- भगवान की विभूति का नाम सत्य है और उसके विधान का ऋत है।
- इंद्रियों का संयम विजय तथा संपत्ति का मार्ग है और इनका असंयम ही पराजय तथा विपत्ति का मार्ग है।
- जीवन के वाम और दक्ष दो मार्ग हैं। जिसकी इच्छा चाहे जहां जाए, योग की या अथवा भोर की ओर।
- जाति प्रकृति के नियम में उल्लंघन तथा आदि प्रभु के नियम में उल्लंघन का परिणाम है।
- वित्त भारी संपत्ति है और वृत आंतरिक संपत्ति है।
- कलापूर्ण मानव जीवन पूर्णिमा है और कालाहीन मानव जीवन अमावस्या है।
- नियम यम के लिए है नियम के पालन में यम की हत्या मत करो।
- मानवीय कल्पतरु का नाम शांति है।
ब्रह्मचारी अखिलानंद जी – झरिया