Mata Leelawati Arya Bhikshu Propkarini Nyas

स्वामी आत्मबोध सरस्वती (पूर्व नाम महात्मा आर्यभिक्षु)

जन्म: 31 जनवरी 1923 मुगलसराय जिला वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

नाम: रामजी प्रसाद गुप्त (बचपन का), महात्मा आर्य भिक्षु (वानप्रस्थ का) स्वामी आत्मबोध सरस्वती (संन्यास का)

पिता-माता: श्री पूर्णमासी प्रसाद गुप्त वाह श्रीमती राजकुमारी। पिता व्यवसायी व बैंकर। पौराणिक विचारधारा के।

राजनीति से संबंध: 1942 में पढाई छोड़ कर भारत छोड़ो आंदोलन में भागीदारी।

समाज सेवा: मुगलसराय नगर पालिका के लम्बे समय तक अध्यक्ष रहे।

सत्याग्रह: 1957 में हिंदी रक्षा आंदोलन के समय अपने जत्थे के सत्याग्रहियों के जत्थेदार के रूप में कैद हुए और अंबाला सेंट्रल जेल (पंजाब) में 6 मास का कैदी जीवन व्यतीत किया।

आर्य समाज से संबंध: रेलवे बुक स्टॉल से प्यार प्रकाश प्राप्त किया इसके अध्ययन से प्रभावित/लाभन्वित हुए।  1945 में आर्य समाज मुगलसराय के प्रधान हुए। समय-समय पर जिला सभा व  आर्य प्रतिनिधि उत्तर प्रदेश विभिन्न पदों पर निर्वाचित हुए। 1963 से कईं वर्षों तक सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के उपप्रधान रहे।  उत्तर प्रदेश आर्य वीर दल के काई वर्ष सक्रिय संचलक रहे।

विवाह: 22 वर्ष की आयु में 1 अगस्त 1945 को जौनपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी मास्टर हरिनारायण जी की सुपुत्री लीलावती गुप्ता के साथ।

आर्य वानप्रस्थ आश्रम में आगमन, आश्रम व्यवस्था का पालन व दीक्षा:

अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश के अतिरिकत नैष्ठिक ब्रह्मचारी पंडित अखिलानंद जी (झरिया) से प्रभावित हुए, उनको अपना गुरु और आदर्श माना आश्रम जीवन व्यतीत करने हेतु अपने पितृगृह से आर्य वानप्रस्थ आश्रम में सपत्नी आकर रहने लगे और  मृत्यु पर्यन्त आश्रम में रहे।

1973 में 50 वर्ष की आयु में विद्या मार्तण्ड स्वामी धर्मानन्द जी से वानप्रस्थ तथा 1998 में 75 वर्ष की आयु में तपोमूर्ति स्वामी सर्वानन्द जी से संन्यास की दीक्षा ली।

उपाधि: भारत छोड़ो आंदोलन के समय 1942 में अपनी पढाई छोड़ दी थी। परंतु आश्रम में रहते हुए अपने स्वाध्याय से गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर के विद्या वाचस्पति की उपाधि प्राप्त की।

विविध संस्थाओं से संबंध: आर्य वानप्रस्थ आश्रम ज्वालापुर के कईं बार प्रधान हुए। वैदिक मोहन आश्रम के मुख्य न्यासी रहे। गुरुकुल महाविद्यालय अयोध्या के कुलपति रहे। महर्षि दयानंद निर्वाण स्मारक न्यास के वर्षों प्रधान रहे। गुरुकुल आश्रम लखनऊ के मृत्यु पर्यंत अध्यक्ष रहे। माता लीलावती आर्य व्यक्षु परोपकारिणी निवास के संस्थापक प्रधान रहें।

होता मंडल के संस्थापक हुए। वर्षों टंकारा न्यास से जुड़े रहे।

प्रकाश रचनाएँ: बोधामृत (वैदिक धर्म का प्रमाणिक निवेचन) महर्षि दयानंद और वर्ल्ड पीस (अंगरेजी में) व्याख्यान मुक्तावली (व्याख्यान संग्रह)

इन रचनाओं का प्रकाशन माता लीलावती आर्य भिक्षु परोपकारिणी न्यास से हुआ

कार्य क्षेत्र: संपूर्ण भारत में महर्षि दयानंद सरस्वती का संदेश एवंम आर्य समाज का प्रचार-प्रसार।

महाप्रयाण: बुधवार 4 सितम्बर 2002 ब्रह्म बेला।

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